बहुत से शायरों को सबसे पहले आजमाया था ।
गजल की इस हसीं बस्ती को तब हमने बसाया था ॥
शरीफों को या चोरों को तवज्जो सब को दी हमने।
किसी ने दिल दुखाया था किसी ने दिल चुराया था॥
गजल की सल्तनत पर कुछ हूकुमत का थे दम भरते॥
उन्हे मतले का मतलब भी हमी ने ही बताया था॥
हां ये भी सच है कि कुछ तो खता हमसे हुई होगी ।
मगर यारों खताओं ने ही तो हमको सिखाया था ।
गजल कहना हमेशा ही रहा है खेल लफ्जों का ।
किसी ने गुनगुनाया था किसी ने बस सुनाया थया
राजीव कुमार
No comments:
Post a Comment