फ़क़ीर है बड़ा वो सबका रहनुमा भी है/
ख़ुदा कभी नहीं कहता की वो ख़ुदा भी है/
उसे जो देखना चाहो तो ये जहाँ देखो ,
वही है फूल की खुसबू में वो फ़िज़ा भी है/
दिलों में पाक मोहब्बत की दास्ताँ है वो ,
वही तो इश्क़ में जिन्दा है वो वफ़ा भी है/
हर एक शक्स है सफर पे बेखबर लेकिन,
किसी का रास्ता किसी का हमनवां भी है
अगर हो दर्द तो रहता है वो दवा की तरह ,
हर एक साँस में चलता है वो हवा भी है
राजीव कुमार
ख़ुदा कभी नहीं कहता की वो ख़ुदा भी है/
उसे जो देखना चाहो तो ये जहाँ देखो ,
वही है फूल की खुसबू में वो फ़िज़ा भी है/
दिलों में पाक मोहब्बत की दास्ताँ है वो ,
वही तो इश्क़ में जिन्दा है वो वफ़ा भी है/
हर एक शक्स है सफर पे बेखबर लेकिन,
किसी का रास्ता किसी का हमनवां भी है
अगर हो दर्द तो रहता है वो दवा की तरह ,
हर एक साँस में चलता है वो हवा भी है
राजीव कुमार
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