भोजपुरी ग़ज़ल
पास रहेके जब मजबूरी बढ़ जाई
हमरे तहरे बीच के दूरी बढ़ जाई
बात बात में मुड़ी हिला के हँ कहऽ बऽ
ए आदत से जी हूजूरी बढ़ जाई
शहर पहुंच के बात समझ में इ आइल
पेट कटी लेकिन मजदूरी बढ़ जाई
देखऽ थोङा बहुत अन्हरिया भी चाहीं
सिर्फ अजोरा से बेनूरी बढ़ जाई
सांच कहऽ या झूठ अरे कुछ कहऽ तऽ
होई अगर इ बात जरूरी बढ़ जाई
प्यार में जेतना बदनामी होई ओतने
हमरे जईसन के मशहूरी बढ़ जाई
राजीव कुमार
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