भोजपुरी ग़ज़ल
प्रीत के रीत अइसे निभाये के बा
जान लागी त जानो लुटाये के बा
आंख से लोर हस के बहाये के बा
दर्द होखी त बस मुस्कुराये के बा
सबके भीतर से भय के अन्हरिया मिटे
अइसनों ए गो दियरी जराये के बा
केहू रोये त ई देख के हो खुशी
खुद के एतना न बाउर बनाये के बा
जिन्दगी रेत पर ऊ लिखल नाम ह
जे के लिक्खे के बा फिर मिटाये के बा
जबले बाबू जी रहलन पते ना चलल
खर्च कइले से पहिले कमाये के बा
सिर्फ थरिया बजवला से ना होई कुछ
हर मुसीबत से खुद के बचाये के बा
ई बेमारी के दानव के हमनी के अब
ढक के मुंह हाथ धो के हराये के बा
राजीव कुमार
No comments:
Post a Comment