Monday, October 5, 2020

बेहतर को बेहतरीन बनाने की एक ज़िद

 ग़ज़ल 


बेहतर को बेहतरीन बनाने की एक ज़िद

आदम को है मशीन बनाने की एक ज़िद


शाइर बने तो बनते ही इस दिल में बन गयी

हर वाक़िए को सीन बनाने की एक ज़िद


नफ़रत कहीं न हमको मिटा दे सो इश्क़ पर

पैदा करो यक़ीन बनाने की एक ज़िद


हर बार तू ही साँप बनेगा तो मुझे भी 

है यार आस्तीन बनाने की एक ज़िद


इक नौजवां का नौकरी पाना इस अहद में

सागर पे है ज़मीन बनाने की एक ज़िद


चैनल हमारे मुल्क़ के पाले हुए हैं अब 

सबको तमाशबीन बनाने की एक ज़िद


शाइर गुलाम रिन्द सभी बन चुके हैं हम

ख़ुद को है अब मतीन बनाने की एक ज़िद


इक रोज मेरे बाद कहोगे जहान को

मुझमें ही थी ज़हीन बनाने की एक ज़िद


राजीव कुमार


मतीन - जिसमें मतानत हो, गंभीर, धीर, शांतचित्त, संजीदः ।

No comments:

Post a Comment

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...