Wednesday, October 14, 2020

हिन्दी औ उर्दू सी लज्ज़त पाई है।

ग़ज़ल 


हिन्दी औ उर्दू सी लज्ज़त पाई है।

भोजपुरी का लहजा दूध मलाई है। 


मोम से ज्यादा माँ कहना मीठा है पर।

माँ जी से भी ज्यादा मीठी माई है।


उसके साथ भी खाली था घर लेकिन अब।

मैं हूँ इक तस्वीर है औ तन्हाई है।


एक बुराई अपने दिल में पाल के सब।

देख रहे हैं किस किस में अच्छाई है।


रोज नयी दीवार उठाते हैं घर में ।

घरवालों के बीच में फिर भी खाई है।


हाथ में है कशकोल अभी भी बच्चों के।

ये भी अपने दौर की इक सच्चाई है ।


सीधे घर के अंदर आ जाती है दोस्त ।

बीमारी ने कुण्डी कब खङकाई है ।


घर-घर मातम फैल गया है पर अब भी।

कोरोना पर चाल हमारी ढाई है।


राजीव कुमार

कशकोल- भिक्षा पात्र

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