ग़ज़ल
ख़ुद के खिलाफ़ कौन है कोई भी तो नहीं
इतना भी साफ़ कौन है कोई भी तो नहीं
कहते हैं आफताब है दुनिया की नाफ़ तो
मेरे तवाफ़ कौन है कोई भी तो नहीं
जो सर उठा के देख सके दूर की यहाँ
ऐसा जिराफ़ कौन है कोई भी तो नहीं
सच बोलना गुनाह अगर है तो माई लार्ड
हम सब में माफ़ कौन है कोई भी तो नही
ख़ुद को तबाह करके हसे जो मेरी तरह
बुद्धि से हाफ़ कौन है कोई भी तो नहीं
राजीव कुमार
नाफ़- धूरी (जिसके चारो तरफ चक्कर लगाते है)
तवाफ़- चक्कर लगाना
No comments:
Post a Comment