Monday, October 5, 2020

चौका बर्तन लकङी लवना सब पर गरहन लाग गइल

 भोजपुरी ग़ज़ल 


चौका बर्तन लकङी लवना सब पर गरहन लाग गइल

उनके घर से जाते घर के भीतर गरहन लाग गइल


फूल उगावे के फेरा में एतना कांट रोपाइल की

फुलवारी के रूप रंग के ऊपर गरहन लाग गइल


चोरी चुपके देखके उनके प्रीत के अइसन लागल रोग 

देखत देखत हमरे जान के ऊपर गरहन लाग गइल


चांद भी उनके पीछे छुप के ललचाये ला सूरज के 

और कहे ला देख ल केतना सुन्दर गरहन लाग गइल


रोज अन्हरिया रात में उनकर सपना देख के लागेला 

भोर में जैसे हमरे आंख के भीतर गरहन लाग गइल


दुनिया के ई रीत ह या फिर भगवाने के मर्जी ह 

प्रेम करे वालन के ऊपर अक्सर गरहन लाग गइल


राजीव कुमार

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