पेशे खिद़मत है कुछ नये अंदाज में ।
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कभी चाहा नहीं हमने कि हेमा मिल गयी होती ।
बस इतना चाहते थे हम कि विद्या मिल गयी होती।
(हेमा-पृथ्वी विद्या- शिक्षा)
कई सागर इन आंखों में लिये फिरते तो हैं लेकिन ।
हमारी प्यास मिट जाती जो सरिता मिल गयी होती ।
अंधेरा सारी दुनियां से मिटा देता मैं इक पल में ।
अगर मुझको मेरे भीतर की दीपा मिल गयी होती।
मेरा घर भी किसी मंदिर के मानिंद हो गया होता।
अनुष्का बन के गर मुझको तनूजा मिल गयी होती ।
(मानिंद - की तरह , अनुष्का - दुर्गा स्वरूप , तनूजा - बेटी )
बहुत से लोग धरती पर कभी भूखे नहीं रहते।
जो खेतों और खलिहानों को बरखा मिल गयी होती।
(बरखा - बारिश)
हर इक इन्सान अपनी जात से बाहर निकल जाता ।
अगर दुनिया को खुशियों की मनीषा मिल गयी होती।
(मनीषा - इच्छा )
जगाने हर सुब्ह मुझको चली आती जो बागो में ।
मुझे गर सारिका बन कर प्रियंका मिल गयी होती।
(सारिका -कोयल, प्रियंका - सून्दर स्त्री )
राजीव कुमार
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कभी चाहा नहीं हमने कि हेमा मिल गयी होती ।
बस इतना चाहते थे हम कि विद्या मिल गयी होती।
(हेमा-पृथ्वी विद्या- शिक्षा)
कई सागर इन आंखों में लिये फिरते तो हैं लेकिन ।
हमारी प्यास मिट जाती जो सरिता मिल गयी होती ।
अंधेरा सारी दुनियां से मिटा देता मैं इक पल में ।
अगर मुझको मेरे भीतर की दीपा मिल गयी होती।
मेरा घर भी किसी मंदिर के मानिंद हो गया होता।
अनुष्का बन के गर मुझको तनूजा मिल गयी होती ।
(मानिंद - की तरह , अनुष्का - दुर्गा स्वरूप , तनूजा - बेटी )
बहुत से लोग धरती पर कभी भूखे नहीं रहते।
जो खेतों और खलिहानों को बरखा मिल गयी होती।
(बरखा - बारिश)
हर इक इन्सान अपनी जात से बाहर निकल जाता ।
अगर दुनिया को खुशियों की मनीषा मिल गयी होती।
(मनीषा - इच्छा )
जगाने हर सुब्ह मुझको चली आती जो बागो में ।
मुझे गर सारिका बन कर प्रियंका मिल गयी होती।
(सारिका -कोयल, प्रियंका - सून्दर स्त्री )
राजीव कुमार