Friday, August 14, 2015

हमेशा मुश्किलों की शक्ल में है।

हमेशा मुश्किलों की शक्ल में है।
सुकूने दिल गमों की शक्ल में है।
पढे लिक्खों की दुनियां में रिफाकत।
किसी से रंजिशो की शक्ल में है।
मुहब्बत की कहानी हर किसी की
अधूरी ख्वाहिशों की शक्ल में है
जिसे अपना कहा था आज वो ही।
नुकीले खंजरों की शक्ल में है।
हिमायत गर करुं ईमान की तो ।
जमाना दुश्मनों की शक्ल में है।
खुदा भी छोङ कर दैरो हरम अब।
जहां में रोटियों की शक्ल में है।
मुकद्दर आईना है मुफलिसों का ।
हुकूमत पत्थरों की शक्ल में है।
हमारे मुल्क में महंगाई जैसे ।
भयानक डायनों की शक्ल में है।
सदाकत देखिये अच्छे दिनों की
सियासी साज़िशों की शक्ल में है
राजीव कुमार
दैरो हरम - मंदिर मस्जिद
सदाकत - सच्चाई
रिफाकत- दोस्ती

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