Friday, August 14, 2015

मुहब्बत है क्या अब दिखा दिजिये

मतला
मुहब्बत है क्या अब दिखा दिजिये
हमारी तरह दिल जला दीजीये
मरीजों को दिल की दवा दीजिये
हमें आप भी अब दुआ दीजिये।
हमें अपने दिल से मिटा दिजीये
हमें आशिकी की सजा दिजीये
लबों से लगा के हमें जानेजा
गजल क्या हे हमको बता दीजिये
निगाहों से बातें बहुत हो चुकी
इरादा है क्या अब बता दिजीये
हमें मशवरा दे रहें हे जो दानिश
उन्हें आईना तो दिखा दिजीये
जहां में हमारा ठिकाना नहीं ।
हमें अपने दिल का पता दिजीये
ये शर्मो हया सादगी के तकल्लूफ।
ये पर्दे किसी दिन हटा दीजीये ।
सलामत रहेगी मुहब्बत हमारी।
हमें आप बेशक मिटा दिजीये।
राजीव कुमार

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