शत शत नमन भारत रत्न डा0 ए पी जे अब्दुल कलाम साहब
हम हार गए आज अपने जिस्मो जान से
कुछ कह भी न सकेंगे दिले बेज़बान से
कुछ कह भी न सकेंगे दिले बेज़बान से
जज्बा जूनून जोश रवानी ओ फुक्र भी।
सब देके वो चला गया हिन्दोस्तान से
सब देके वो चला गया हिन्दोस्तान से
बच्चो लो अब तुम्हारे हवाले हैं मेरे ख्वाब।
देखा करूंगा अब मैं तुम्हें आसमान से
देखा करूंगा अब मैं तुम्हें आसमान से
जीना तो इस तरह कि सलामी दे जिन्दगी।
रुख्सत के वक्त देखना निकलोगे शान से।
रुख्सत के वक्त देखना निकलोगे शान से।
मजहब बना के मुल्क को सीने से लगा लो।
दुनिया हिला न पायेगी तुमको ईमान से ।
दुनिया हिला न पायेगी तुमको ईमान से ।
मुझको न याद करना मगर ये न भूलना।
कुछ भी बङा नहीं मेरे भारत महान से।
कुछ भी बङा नहीं मेरे भारत महान से।
राजीव कुमार
फुक्र - साधु सज्जनता
No comments:
Post a Comment