राहों मे इश्क के ये अलम और कितनी देर
रस्मों रवायतो के सितम और कितनी देर
रस्मों रवायतो के सितम और कितनी देर
मुद्दत के बाद आये वो ख्वाबों में एक रोज।
गर है करम तो ये करम और कितनी देर
गर है करम तो ये करम और कितनी देर
मेरा मिजाज हुस्न तेरा और ये शमां ।
मुझसे रहेगा दूर सनम और कितनी देर ।
मुझसे रहेगा दूर सनम और कितनी देर ।
आंखों में उसका अक्स है जो सामने नहीं।
कायम रहेगा ये भी वहम और कितनी देर
कायम रहेगा ये भी वहम और कितनी देर
अब और कितनी देर ये रंजिश ये नफरतें।
आखिर लङेंगे दैरो हरम और कितनी देर
आखिर लङेंगे दैरो हरम और कितनी देर
रिस्ता ए दिल भी अब तो जरूरत का नाम है।
तू मेरे बहम है तो बहम और कितनी देर
तू मेरे बहम है तो बहम और कितनी देर
राजीव कुमार
वहम -- झुठी मान्यता
बहम - साथ
अलम -- दुख
दैर ओ हरम - मंदिर मस्जिद
बहम - साथ
अलम -- दुख
दैर ओ हरम - मंदिर मस्जिद
No comments:
Post a Comment