असर है जो मोहोब्बत का निकल जाता है सीने से,
ये वो कहते हैं जो रोजी कमाते हैं पसीने से /
अगर माशूक के आँखों से ही पीते सभी शायर,
खबर फिर ये नहीं आती मरे हैं लोग पीने से /
उछल कर चाँद छूने का जो दम भरते हैं उनका तो,
ये ही सच है कि कोठे पर भी ये जाते है जीने से /
सियासत का वफ़ा से हो न हो रिश्ता कोई तो है,
किसी का हाथ पकड़े और लगा कोई करीने से /
थे जब तक हम भी चाहत में हमें भी रश्क रहता था,
शिकायत अब हुई है जा के इस पिछले महीने से/
राजीव कुमार
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