Thursday, December 26, 2013

मैं गीत लिखूं और तू गाए,

मैं गीत लिखूं और तू गाए,
शब्दों में मेरे तू ही आये/
इस राग-द्वेष  में जीने से ,
अच्छा है की मरना हो जाये/
दिल लेना देना कर लें हम  ,
दिल का नज़राना हो जाये

कुछ सुनना सुनाना हो जाये
कुछ कहना बताना हो जाये/

ले मैँ भी तुझसे हार गया ,
पर बाजी भी मैँ मार गया ,
तू मुझे हराने आया था /
दिल हार के तू भी यार गया ,
हर बार तेरे तक जाने का
हर लफ्ज बहाना हो जाये/

मैं तेरा ठिकाना हो जाऊं/
तू मेरा ठिकाना हो जाये/

जो बीत गयी उन बातों से
दुःख दर्द भरे ज़ज्बातों से
नफरत की अँधेरी रातों से
तू भी अंजाना  हो जाये/
होते होते ऐ यार मेरे ,
ये इश्क़ पुराना हो जाये/,

मैं तेरा दीवाना हो जाऊं
तू मेरा दीवाना हो जाये/

जो बात नहीं की थी अब तक
चल वो भी हम मिल यार करें
जीना है तो चल संग जियें
हर ढंग निराला हो जाये
लड़ ले चल हम इस दुनिया से,
कुछ नाम कमाना हो जाये/

कुछ भी कर जाना हो जाये/
तुझ पे मर जाना हो जाये/

मैं सोचता हूँ वादा कर लें
अब खुशियों से नाता कर लें
तू मुझमे है मैँ तुझमे हूँ ,
ये बात तराना हो जाये/
इस नए ज़माने में चल अब
इक  नया फ़साना हो जाये,

ये शमा सुहाना हो जाये/
तू यार पुराना हो जाये

राजीव कुमार 

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