Thursday, December 19, 2013

फूलों से तितली का प्यार पुराना है,

ज़ुल्म हमेशा हम पर ढाने आते है।
ख़्वाब तुम्हारे हमें सताने आते हैं ।

प्यार पुराना है फूलों से तितली का 
भौरे तो बस प्यास मिटाने आते हैं ।

गावं पुरानी यादों का  घर  मेरा है।
बाग बगीचे याद दिलाने आते हैं।

पत्थर के जंगल से दिखते शहरों में,
छोङ के अपने गांव को क्युंकर आते हैं।

चिंता से क्या क्या खो देते देखा है,
हम तो बस अहसास कराने आते हैं,

जितना करते हैं उतना ही पाते हैं,
दुनिया में हम सब ही आते जाते है /

राजीव कुमार

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