अहसासों कि इन बातों का
अंदाजे बयां कुछ ऐसा हो,
कागज का समंदर हो,
उसमे स्याही भी मोती जैसा हो/
बिक जाता है ईमान यहाँ
चेहरे कि भी रंगत बिकती हो,
तेरे हुनर को कोई खरीद सके
ऐसा रुपया न पैसा हो/
लफ्जों कि महक भी इतनी हो '
हर लफ्ज फिजा का फूल लगे,
हर हर्फ़ का मंजर सबनम कि,
बूंदों के चमक के जैसा हो/
राजीव कुमार
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