नज़र मिली नहीं कि इश्क़ का बुखार चढ़ गया,
कुछ ही दिनों के साथ में खुमार ये उतर गया/
नये लिबास ने अदब का कायदा बदल दिया,
निगाह क्या करे कि जब बदन निगाह पर गया/
दिलों का साथ क्या है आज का बड़ा सवाल है,
जो आज इसके साथ था वो उसका साथ कर गया/
मोहब्बतों की नथ भी पार्कों में है उतर गयी,
मिटा के भूख जिस्म की हर एक शक्स घर गया ।
अजी ये प्यार है जनम जनम का किसने कह दिया, मिला ये ही सबक कि जबसे गावं से शहर गया/ नयी रवायतों के दौर में शाइर आज कल, किसी की आशिक़ी में बस तड़प तड़प के मर गया/
अजी ये प्यार है जनम जनम का किसने कह दिया, मिला ये ही सबक कि जबसे गावं से शहर गया/ नयी रवायतों के दौर में शाइर आज कल, किसी की आशिक़ी में बस तड़प तड़प के मर गया/
राजीव कुमार
No comments:
Post a Comment