Friday, December 13, 2013

नज़र मिली नहीं कि इश्क़ का बुखार चढ़ गया,


नज़र मिली नहीं कि इश्क़ का बुखार चढ़ गया, कुछ ही दिनों के साथ में खुमार ये उतर गया/ नये लिबास ने अदब का कायदा बदल दिया, निगाह क्या करे कि जब बदन निगाह पर गया/ दिलों का साथ क्या है आज का बड़ा सवाल है, जो आज इसके साथ था वो उसका साथ कर गया/ मोहब्बतों की नथ भी पार्कों में है उतर गयी, मिटा के भूख जिस्म की हर एक शक्स घर गया ।

अजी ये प्यार है जनम जनम का किसने कह दिया, मिला ये ही सबक कि जबसे गावं से शहर गया/ नयी रवायतों के दौर में शाइर आज कल, किसी की आशिक़ी में बस तड़प तड़प के मर गया/
राजीव कुमार

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