ग़ज़ल-
जहाँ-जहाँ भी हमें मयक़दा दिखाई दिया।
हर एक शख़्स वहाँ एक-सा दिखाई दिया।
नयी उम्मीद नया वलवला दिखाई दिया।
हमारी राह में जब मरहला दिखाई दिया।
जब आँख बंद हुई तब भी काम आया दिल
इसी से ख़्वाब इसी से ख़ुदा दिखाई दिया।
अदाएँ, रंग, हया, हुस्न ही नहीं उसमें।
अलग मिज़ाज, अलग ज़ाविया दिखाई दिया।
क़ुसूर मेरा नहीं आइने का है, जिसमें।
मेरी ही शक़्ल का इक दूसरा दिखाई दिया।
यही तो फ़र्क है इस हुक्मरां में और हम में।
हमें लहू तो उसे ज़ायका दिखाई दिया।
तुम्हारे शह्र तुम्हारे निज़ाम में हमको।
हर एक ज़ुल्म, हर इक सानिहा दिखाई दिया।
करोड़ों लोग उसी शह्र के पते पर हैं।
जहाँ हर एक हमें लापता दिखाई दिया।
तुम्हारे साथ मुझे आज का ये दिन सच में।
बहुत हसीन बहुत खुशनुमा दिखाई दिया।
राजीव कुमार
वलवला- जोश,उमंग
मरहला - मुश्किल difficulty
सानिहा - दुर्घटना
जहाँ-जहाँ भी हमें मयक़दा दिखाई दिया।
हर एक शख़्स वहाँ एक-सा दिखाई दिया।
नयी उम्मीद नया वलवला दिखाई दिया।
हमारी राह में जब मरहला दिखाई दिया।
जब आँख बंद हुई तब भी काम आया दिल
इसी से ख़्वाब इसी से ख़ुदा दिखाई दिया।
अदाएँ, रंग, हया, हुस्न ही नहीं उसमें।
अलग मिज़ाज, अलग ज़ाविया दिखाई दिया।
क़ुसूर मेरा नहीं आइने का है, जिसमें।
मेरी ही शक़्ल का इक दूसरा दिखाई दिया।
यही तो फ़र्क है इस हुक्मरां में और हम में।
हमें लहू तो उसे ज़ायका दिखाई दिया।
तुम्हारे शह्र तुम्हारे निज़ाम में हमको।
हर एक ज़ुल्म, हर इक सानिहा दिखाई दिया।
करोड़ों लोग उसी शह्र के पते पर हैं।
जहाँ हर एक हमें लापता दिखाई दिया।
तुम्हारे साथ मुझे आज का ये दिन सच में।
बहुत हसीन बहुत खुशनुमा दिखाई दिया।
राजीव कुमार
वलवला- जोश,उमंग
मरहला - मुश्किल difficulty
सानिहा - दुर्घटना
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