Sunday, August 27, 2017

ये इश्क यूं तो बुरा नहीं है

 ग़ज़ल

ये  इश्क  उतना  बुरा  नहीं है।
के जब तलक ये हुआ नहीं है।

हमें  पता  है  तुम्हारे  दिल में।
हमारी  ख़ातिर  वफ़ा  नहीं है।

स्याह   रातें   उदास   मौसम।
ये  दर्द  सबको  पता  नहीं है।

मैं आईना बन गया हूं लेकिन।
वो  अक्श  मेरा  बना  नहीं है।

जिसे मैं अपना समझ रहा था
वही तो सच मुच मिरा नही है।

वो  नापता  है  हमारे  कद को
जो  यार  हमसे  बड़ा  नहीं है।

शहर जलाया है जिसकी खातिर
वो  आदमी   है  ख़ुदा  नहीं  है।

अजीब दुनिया है जिसमें इन्सां
कभी  ख़ुदा  से  मिला  नहीं  है।

हमारी सोहबत में आ गया जो
वो  यार  खुद का  रहा  नहीं है।

राजीव कुमार 

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