गजल
पहले खुद पर तो एतबार करो
फिर जमाने से रश्क यार करो
ये बूलंदी भी यूं नहीं मिलती।
कोशिशें दिल से बार बार करो।
जो न सोने दे चैन से तुमको।
ऐसी दौलत को दर किनार करो
अब तो फौलाद बन गया हूं मैं।
वार कोई तो जोरदार करो
छिन कर ये जमीं किसानों की
इनकी खुशियां न तार तार करो।
सुट महंगा तो था मगर यारों।
इतना महंगा न कारोबार करो ।
राजीव कुमार
पहले खुद पर तो एतबार करो
फिर जमाने से रश्क यार करो
ये बूलंदी भी यूं नहीं मिलती।
कोशिशें दिल से बार बार करो।
जो न सोने दे चैन से तुमको।
ऐसी दौलत को दर किनार करो
अब तो फौलाद बन गया हूं मैं।
वार कोई तो जोरदार करो
छिन कर ये जमीं किसानों की
इनकी खुशियां न तार तार करो।
सुट महंगा तो था मगर यारों।
इतना महंगा न कारोबार करो ।
राजीव कुमार
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