बस युं ही
अरे राजीव क्युं पछता रहा है।
यहां हर शक्स धोखा खा रहा है।
मुहब्बत काम है जब पागलों का
तू इसमें खुद को क्यु उलझा रहा है
जुदा होकर भी तुझसे जी रहा हूं
यही गम मुझको खाये जा रहा है
जिसे मैं पा ही जाना चाहता हूं
उसे ही मुझसे छीना जा रहा है
हिमायत कर रहा है रौशनी की
जो खुद भीतर से अंधेरा रहा है
वो निकला है अभी जो मयकदे से
वही गम ख्वार हसता जा रहा है
Rajeev kumar
अरे राजीव क्युं पछता रहा है।
यहां हर शक्स धोखा खा रहा है।
मुहब्बत काम है जब पागलों का
तू इसमें खुद को क्यु उलझा रहा है
जुदा होकर भी तुझसे जी रहा हूं
यही गम मुझको खाये जा रहा है
जिसे मैं पा ही जाना चाहता हूं
उसे ही मुझसे छीना जा रहा है
हिमायत कर रहा है रौशनी की
जो खुद भीतर से अंधेरा रहा है
वो निकला है अभी जो मयकदे से
वही गम ख्वार हसता जा रहा है
Rajeev kumar
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