आज की कोशिस
दिल में नफरत के हर शै अंगारे हैं ।
देखो ऐसे अच्छे दिन हमारे हैं ।
मंदिर मस्जिद गिरजा हैं गुरुद्वारे हैं।
क्या जाने हम किस किस के सहारे हैं ।
हाथ में परचम आज अमन का है जिनके।
उनके ही हाथों हम सबकुछ हारे हैं।
भूख गरीबी महंगाई और काळा धन।
क्या अब भी ये सब मुद्दे हमारे है।
आन अना ईमान अकीदत और वफा।
मुश्किल में अब तो सारे के सारे है।
राजीव कुमार
दिल में नफरत के हर शै अंगारे हैं ।
देखो ऐसे अच्छे दिन हमारे हैं ।
मंदिर मस्जिद गिरजा हैं गुरुद्वारे हैं।
क्या जाने हम किस किस के सहारे हैं ।
हाथ में परचम आज अमन का है जिनके।
उनके ही हाथों हम सबकुछ हारे हैं।
भूख गरीबी महंगाई और काळा धन।
क्या अब भी ये सब मुद्दे हमारे है।
आन अना ईमान अकीदत और वफा।
मुश्किल में अब तो सारे के सारे है।
राजीव कुमार
No comments:
Post a Comment