गजल
इश्क इबादत और अकीदत थाम लिया
दुनिया भर का अपने सर इल्जाम लिया ।
ऐश परस्ती गुल्ली डंडा लूका छिपी
बचपन में यारों से कितना काम लिया।
नादां जिसको सदियां बर्षों कहते हैं
उन सदियों ने हमसे सुब्हो शाम लिया ।
बांट के उपर वाले को इन लोगों ने
सिक्ख ईसाई हिन्दू और इस्लाम लिया।
जन्नत रहमत और जियारत भूल गया ।
बिटिया ने जब पापा कह के नाम लिया।
राजीव कुमार
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