Monday, August 14, 2017

इश्क इबादत और अकीदत थाम लिया

गजल

इश्क इबादत और अकीदत थाम लिया 
दुनिया भर का अपने सर इल्जाम लिया ।

ऐश परस्ती गुल्ली  डंडा लूका छिपी 
बचपन में यारों से कितना काम लिया।

नादां जिसको सदियां बर्षों कहते हैं
उन सदियों ने हमसे सुब्हो शाम लिया ।

बांट के उपर वाले को इन लोगों ने 
सिक्ख ईसाई हिन्दू और इस्लाम लिया।

जन्नत रहमत और जियारत भूल गया ।
बिटिया ने जब पापा कह के नाम लिया।

राजीव कुमार

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