Thursday, June 9, 2016

सिर्फ आजाद होने का सबक मांग रहा है

सिर्फ आजाद होने का सबक मांग रहा है
वो गुनहगार नहीं जो हक मांग रहा है।
दुश्मनी देखो अंधेरों की उसी से है जो
इन अंधेरों में चिरागों से चमक मांग रहा है
आम इन्सान था औकात में रहता लेकिन ।
तू हूकूमत से हूकूमत की ठसक मांग रहा है।
सच कहुं गर मैं हकीकत का हवाला दे कर
हुक्मरां अब तो यहां जान तलक मांग रहा है
हम किसानों को मियां थोङी तो राहत दे दो।
आप से कौन सितारा ए फलक मांग रहा है।
राजीव कुमार

किसानों को फसलों की कीमत दिला दो


किसानों को फसलों की कीमत दिला दो
इन्हें आप मत अब सगुफा नया दो
न अधिया न पौवा न देशी न इंग्लिस
इलेक्सन खतम हो गया हे बता दो
बहुत देश भक्ती दिखाई हे तुमने
कहां कला घन है ये अब तो दिखा दो
पुराने दिनों को भले कोस लेना ।
मगर अच्छे दिन का कोई तो पता दो
राजीव कुमार

अगर झूठ बोला हे तो फिर सजा दो

अगर झूठ बोला हे तो फिर सजा दो
मुहब्बत मिटा दो या हमको मिटा दो
अरे आशुंओं मेरी इज्जत बचा दो
कहा है किसी ने मुझे मुस्कुरा दो
न हो जाये जाहिर कहीं गम हमारा
जरा राजे दिल आज तुम ही छुपा दो
हकीकत से तुम चाहे नजरें चुरा लो
मगर आईने की खता तो बता दो
ये जीना हे या खुदकुशी हे खुदाया
गरीबों की खातिर ये हे क्या बता दो
न दौलत न सोहरत न हीरे न मोती
अगर दे शको तो हमें भी दुआ दो
मजेदार है जिन्दगी का सफर भी।
नयी मंजिलों को नया रास्ता दो
Rajeev Kumar

आपने रोटी उठाई फैंक दी

आपने रोटी उठाई फैंक दी
मेरी दिनभर की कमाई फैक दी।
इस कुएं में झांक कर तो देखिये
जिसमें हमने हर भलाई फैंक दी
दर्द में कुछ इस तरह आया मजा।
हमने दर्दों की दवाई फेंक दी।
इस सियासत ने हमारे शह्र पर
आज फिर माचिस जलाई फैंक दी
जात मजहब झूठ धोखा दुश्मनी ।
मयकदे ने हर बुराई फैंक दी।
राजीव कुमार

झूठ का सब्ज बाग दिखता है


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झूठ का सब्ज बाग दिखता है
अब अंधेरा चिराग दिखता है
दौरे हाजिर में आप देखो तो
सबके दामन में दाग दिखता हे
हुक्मारानों को इस सियासत में
बस गुणा और भाग दिखता हे
इक जमाने से दोस्त था लेकिन।
अब वही शक्स नाग दिखता है
हुस्न शोला है गर तुम्हारा तो ।
दिल हमारा भी आग दिखता है
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राजीव कुमार

हुस्न वालों से दिल्लगी छोङो।

हुस्न वालों से दिल्लगी छोङो।
अब मियां ऐसी शायरी छोङो।
कौन हर काम ठीक करता है।
आप भी कुछ न कुछ कमी छोङो।
शाम के पांच बज गये हैं क्या ।
अब तो सरकारी नौकरी छोङो।
है बूरी चीज ये शराब तो फिर ।
सबसे पहले इसे तुम्ही छोङो।
पी के हर रोज सब ये कहते है
यारों कल से ये लत बुरी छोङो ।
मैं हरिद्वार में ही रहता हुं ।
मिलना चाहो तो जिन्दगी छोङों ।
राजीव कुमार

Saturday, January 9, 2016

ये जो इनकार है इकरार भी हो सकता था।

दिल्ली एम्स से बैठे बैठे
ये जो इनकार है इकरार भी हो सकता था।
मुझसे मिलता तो तुझे प्यार भी हो सकता था।
जिन्दगी के सफर में साथ तेरे जाने को ।
तू बुलाता तो मैं तैयार भी हो सकता था ।
आज जिन्दादिली है दिल के जर्रे जर्रे में।
इश्क करके तो ये बेकार भी हो सकता था।
और कुछ दिन अगर ईमान लिये चलता तो ।
यार जीना मेरा दुष्वार भी हो सकता था।
दुश्मनी छोङ के इक बार तो कहता मुझसे।
तेरी खातिर मैं तेरा यार भी हो सकता था।
मेरे बस्ते में किताबें जो न रखते बाबा।
तो मेरे हाथ में हथियार भी हो सकता था।
राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...