Thursday, June 9, 2016

अगर झूठ बोला हे तो फिर सजा दो

अगर झूठ बोला हे तो फिर सजा दो
मुहब्बत मिटा दो या हमको मिटा दो
अरे आशुंओं मेरी इज्जत बचा दो
कहा है किसी ने मुझे मुस्कुरा दो
न हो जाये जाहिर कहीं गम हमारा
जरा राजे दिल आज तुम ही छुपा दो
हकीकत से तुम चाहे नजरें चुरा लो
मगर आईने की खता तो बता दो
ये जीना हे या खुदकुशी हे खुदाया
गरीबों की खातिर ये हे क्या बता दो
न दौलत न सोहरत न हीरे न मोती
अगर दे शको तो हमें भी दुआ दो
मजेदार है जिन्दगी का सफर भी।
नयी मंजिलों को नया रास्ता दो
Rajeev Kumar

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