Tuesday, March 30, 2021

जिनगी मे प्यार बाटे तबले बहार बाटे

 भोजपुरी गीत

जिनगी मे प्यार बाटे तबले बहार बाटे 
जिनगी मे प्यार नइखे त कुछ भी यार नइखे

जब जब खुले इ अंखिया 
तब सामने तू र ह 
जब होखे यार रतिया।
सपना मे तू ही आ व 
यानी कि तहसे मिल के
तहरे ही बात करीं 
दिन रात तू भी हमसे 
हम तोहसे प्यार करीं

जिनगी मे प्यार बाटे तबले बहार बाटे 
जिनगी मे प्यार नइखे त कुछ भी यार नइखे

सुबह से शाम तोहरे
चाहत के नाम तोहरे 
अपने ही मन के ह पर 
ह दिल गुलाम तहरे 
जीवन भी नाम तहरे 
राधे ओ श्याम तोहरे 
मन्दिर मे हमरे घर के 
सीता ओ राम तोहरे 

जिनगी मे प्यार बाटे तबले बहार बाटे 
जिनगी मे प्यार नइखे त कुछ भी यार नइखे

बगीया के फूल जइसे 
चंदा के रूप जइसे 
तू जिन्दगी मे र ह 
सुबह के धूप जइसे 
तू साथ हमरे र ह 
त हमरे जीत हटे 
दिल से क ह तनी हम 
दिल के इ गीत हटे

जिनगी मे प्यार बाटे तबले बहार बाटे 
जिनगी मे प्यार नइखे त कुछ भी यार नइखे

राजीव कुमार

Thursday, March 25, 2021

हमें पता है कि दूर हो तुम करीब आओ

 ग़ज़ल 
हमें पता है कि दूर हो तुम करीब आओ 
हमारी वहसत का हल निकालो हमें बचाओ

लिपट के पेङों से ये परिंदे भी कह रहे है।
हमारी दुनिया से हम परिंदों को मत मिटाओ 

जमीं पे आकर अगर रहेंगी ये मछलियाँ तो 
तुम ही कहोगे कि सागरों से जमीं बचाओ

मै हसते हसते जो रो रहा हूं तो ये भी तय है 
मैं रोते रोते भी हस पङूंगा मुझे रुलाओ

वो एक लङकी जो अब नहीं है हमारे खातिर 
हम अब भी उसके लिये बचे हैं उसे बताओ

जरूर धरती का आसमां पर है कर्ज कोई 
मेरी सुनो तो इसे भी इक दिन जमीं पे लाओ

मै आंसुओं का हिसाब माँगूं तो किससे माँगू 
मेरे गुनाहों की पहले कोई सजा सुनाओ

उसी ने मुझको भुला दिया है कि जिससे अक्सर 
मैं बोलता था कि सारी दुनिया को भूल जाओ
राजीव कुमार

दुनिया की तो याद है दिल की भूल गये

 गज़ल 


दुनिया की तो याद है दिल की भूल गये 

इश्क़ के मारे अपनी बस्ती भूल गये 


उसकी ज़िद थी हमको भूलने की लेकिन 

हम तो अपनी सारी ज़िद ही भूल गये 


जाने कैसे सोती होगी वो लड़की 

हम तो जैसे नींद ही अपनी भूल गये 


याद करें तो कैसे उसको याद करें 

पर्स में रख के फोटो उसकी भूल गये 


इक बेचैनी साथ हमारे रहती है

जब से उसके लब की सूर्खी भूल गये


सुबह का भूला शाम को घर आ जाता है 

यानी दिल में यार हैं लड़की भूल गये


सबकुछ हमने गाँव से ही पाया लेकिन 

शह्र गये तो गाँव की मिट्टी भूल गये 


उसको भूलने के चक्कर में देखो ना 

उसकी बातें याद हैं अपनी भूल गये


राजीव कुमार

Saturday, March 13, 2021

लोग हसी ए डर से कौनो टाल मटोली ठीक ना ह

 भोजपुरी ग़ज़ल 

लोग हसी ए डर से कौनो टाल मटोली ठीक ना ह

अपनो दिल के बात बताव एतना चुप्पी ठीक ना ह 


प्यार करेलू लेकिन हमके प्यार करे से रोकेलू 

दिल से हमरे सू न एतना धक्का मुक्की ठीक ना ह


हुस्न प तहरे दूसर शाइर गजल लिखे ना होखे देम

दूध के रखवाली कsरे में कौनो बिल्ली ठीक ना ह


नयन कटारी हुस्न तबाही अदा त जइसे एटम बम

उनके आगे भाला बरछी चाकू छूरी ठीक ना ह


जान भी ए मे चल जाई और पता भी तहके ना चली 

हसी ठीठोली प्यार के लेके हरोघरी ठीक ना ह


ऊ का जाने देश के हमरे बात के माटी माई के 

इहंवा जे ई बात कही की चोखा लिट्टी ठीक ना ह


पइसा रुपया गाङी घोङा देख के जे परपोज करे।

जीवनसाथी खातिर अइसन लइका लइकी ठीक ना ह


राजीव कुमार

Friday, March 12, 2021

प्यार होखल गुनाह ना होला

प्यार होखल गुनाह ना होला
ए से केहू तबाह ना होला 

फिर भी सच्चाई और महब्बत के
एतना आसान राह ना होला

माई बाबू के बात से निम्मन 
अउर कौनो सलाह ना होला

अब त ला गsता खेती बाड़ी से 
ज्यादा बङहन गुनाह ना होला

जे के दिल से गिरा दे जनता ऊ
कुछ भी होखेला शाह ना होला

प्रेम से बढ़ के लोक शाही में 
कौनो ताकत अथाह ना होला

दिल से निकले न जबले तब तक ले
वाह-वाह वाह-वाह ना होला

राजीव कुमार

Thursday, March 11, 2021

इक अरसे से मेरी खुद से जंग अभी तक जारी है।

ग़ज़ल 

इक अरसे से मेरी खुद से जंग अभी तक जारी है।
एक   तरफ है   बेईमानी एक   तरफ  खुद्दारी  है।

कपड़े फोटो नावेल तोहफे चिट्ठी फूल निशानी याद
जाने कितनी चीजों का घर कमरे की अल्मारी है 

मिट्टी का  मिट्टी में  मिलना ही अंजाम नहीं होता।
सच पूछो तो नये सफर की ये तो बस तैय्यारी है।

वीरानों  की भीङ में बैठा एक परींदा है जिसकी।
शोर में  इक  दुश्वारी है  औ चुप्पी  में  लाचारी है।

जंगल  आग  तबाही  सारे एक जगह ही रहते हैं।
यार  महब्बत  का  किस्सा भी ऐसे ही दो धारी है।

चांद सितारे ख्वाब अंधेरा  और ये घर  की दीवारें।
इक मुद्दत  से गोद  में इनके  हमने रात गुजारी है।

दोस्त किताबें गजलें दौलत तेरी खातिर हर इक से।
जाने  कब-कब  बैर  हुआ है जाने कब से यारी है।

उसका ही आसान है जीना इस दुनिया में जिसके भी
दिल मे  थोङी  नादानी  है  थोङी  सी  मक्कारी है।

घर से  दफ़्तर  के रस्ते  पर  जाते  जाते सोचता हूं।
पीछे  दुनिया   छूट  गयी   है  आगे  दुनियादारी  है।

आती  जाती सांसें मुझसे बोलती रहती हैं  अक्सर।
जीवन  है  इक पेङ  तो राजू सांस तुम्हारी आरी है।

राजीव कुमार


Sunday, March 7, 2021

जेकरा में ईमान बहुत बा

*भोजपुरी ग़ज़ल *

जेकरा में   ईमान   बहुत बा 
अब   उ  परेशान  बहुत बा

जियले मुश्किल  बाटेे  इहंंवा
मरल  त   आसान  बहुत बा

सच्चाई पर अब   के   चली 
इ रस्ता   सुनसान बहुत बा

परजा भूखे  बीया फिर भी 
राजा जी  के शान बहुत बा

हर  मुद्दा  पर  हावी   इहंवा
हिन्दू   मूसलमान   बहुत बा

भूख   गरीबी    बेकारी   से 
इ हाकिम अन्जान बहुत बा

सबके   रोटी    देवे    वाला 
करजा में   कीसान बहुत बा 

पहिले  भी  मुश्किल  रहे पर 
सांसत में अब जान बहुत बा 

चुप  बानी  जा पर हमनी के।
जियरा   में   तूफान बहुत बा 

राजीव 🙏♥️

Saturday, March 6, 2021

दिन खुशनुमा हसीन हर इक रात हो गइल

 भोजपुरी गजल

दिन खुशनुमा हसीन हर इक रात हो गइल
जब उन से बात चीत के शुरवात हो गइल।

बादल बगैर शहर  में  बरसात हो गइल 
अइसन भी एक रोज करामात हो गइल

सीना में हमरे होके भी धङकत बा उनके ला
अइसन ए दिल के हाय रे औकात हो गइल

मिल के ऊ हम से खुश रहे पर लौटते समय 
फिर से  लङाई हमनी में बे बात हो गइल

ओ कर शहर शहर ही रहल पर हमार गांव।
ओ बे वफा के इश्क में देहात हो गइल

राजीव कुमार

Thursday, March 4, 2021

होली जीवन में चाहत के फन ह

 होली जीवन में चाहत के फन ह
होली राधा के दिल में किसन ह
होली लइकन के बस खेल नाहीं
होली हर एक दिल के मिलन ह 

फूल जइसे सभे खिल-खिलाये 
कौनो दुख ना कभी के हू पाये
लाल पीयर हरा नीला धानी 
हर कलर सबके सुन्दर बनाये 
बाग ह अउर इहे चमन ह 
होली जीवन मे चाहत के फन ह

भाई देवर के ईमान रक्खे 
जीजा साली के सम्मान रक्खे
अपने भीतर कबो केहू खातिर 
केहू ना कौनो अपमान रक्खे  
प्रेमी जोङन के खातिर अगन ह
होली जीवन में चाहत के फन ह

दुश्मनी खत्म कइले के दिन ह
दोस्ती करके घूमे के दिन ह 
हिन्दू मुस्लिम के झगङा इहां से
दोस्त ईहे  मिटाये के दिन ह 
रंग चङ जाये जे पर ऊ मन ह
होली जीवन में चाहत के फन ह

राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...