Monday, November 25, 2019

दिल से निकले हुए लफ़्ज़ों को दुआ कहते हैं

*ग़ज़ल*

दिल  से निकले हुए लफ़्ज़ों को दुआ कहते हैं
लब पे आ जाये तो उस शय को सदा कहते हैं

इश्क़  वालों  का अलग  अपना ज़हां है इसमें।
दर्द   को   दर्द   नहीं   कहते   दवा   कहते  हैं।

आपको   देखना   फिर   देखते   रहना  यूं ही।
हम  इसे  इश्क  मगर   लोग  नशा  कहते  हैं।

फूल कहते  हैं  कभी  ख्वाब कभी अपनी जां।
आप  मत पूछिये  हम आप को क्या कहते हैं।

क्या  पता  आपने   कैसा  किया जादू की हम 
आप  को  देख   के  हर   शेर  नया  कहते हैं।

उम्र भर चाहना  उसको जो नहीं मिल सकता।
इस रवायत  को ही  उल्फ़त में सज़ा कहते हैं।

आप  का  हुस्न  है या वादिये कश्मीर की अब।
आप  को  लोग  भी  जन्नत  का ख़ुदा कहते है।

वो जो दुनिया के लिये कुछ भी नहीं कर पाये।
वो  ही हर  बात पे  दुनिया  को बुरा  कहते हैं।

हम  भी हैरान  हैं इस  बात  से हम  जाने  क्युं।
जिसको  देखा  ही  नहीं  उसको ख़ुदा कहते हैं।

राजीव कुमार

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