ग़ज़ल-
प्यार का परचम जबसे हमने थाम लिया
दुनिया भर का अपने सर इल्ज़ाम लिया
चोर-सिपाही, गिल्ली-डण्डा, पोशम्पा
बचपन में यारों से कितना काम लिया
काटने आया था जो पेड़ों को उसने
छाँव में पहले बैठ के कुछ आराम लिया
बाँट के ऊपर वाले को इस दुनिया ने
सिक्ख, ईसाई, हिन्दू और इस्लाम लिया
त्याग, तपस्या, प्यार, वफा, किरदार नहीं
राम से हमने केवल जय श्रीराम लिया
दर्द, मुसीबत, दुश्वारी सब भूल गये
बिटिया ने जब पापा कह के नाम लिया
- राजीव कुमार
प्यार का परचम जबसे हमने थाम लिया
दुनिया भर का अपने सर इल्ज़ाम लिया
चोर-सिपाही, गिल्ली-डण्डा, पोशम्पा
बचपन में यारों से कितना काम लिया
काटने आया था जो पेड़ों को उसने
छाँव में पहले बैठ के कुछ आराम लिया
बाँट के ऊपर वाले को इस दुनिया ने
सिक्ख, ईसाई, हिन्दू और इस्लाम लिया
त्याग, तपस्या, प्यार, वफा, किरदार नहीं
राम से हमने केवल जय श्रीराम लिया
दर्द, मुसीबत, दुश्वारी सब भूल गये
बिटिया ने जब पापा कह के नाम लिया
- राजीव कुमार
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