ग़ज़ल
मुद्दे की बात ये है कि मुद्दा कोई नहीं।
हमको भी अब चुनाव की चिन्ता कोई नहीं।
उस दिन भी मरे भूख से वो कह रहे थे जब।
देखो मेरे निजाम में भूखा कोई नहीं
सर पे हर इक गरीब के छत देंगे इस दफा
वो कर रहा है जिसका भरोसा कोई नहीं
हम हैं तो सब हैं ठीक वगरना यहां पे तो।
हर आदमी ख़राब है अच्छा कोई नहीं
स्कूल अस्पताल खेत गांव जानवर
वाजिब है जो सवाल उठाता कोई नहीं
सूरत बदलने वाले बदलने लगे हैं नाम ।
हालात क्युं शहर के बदलता कोई नहीं
लोगों के मसअले हैं हुए जबसे दरकिनार
तब से किसी चुनाव में जीता कोई नहीं
राजीव कुमार
यू ट्यूब -- https://youtu.be/tueIBNZEW_U
मुद्दे की बात ये है कि मुद्दा कोई नहीं।
हमको भी अब चुनाव की चिन्ता कोई नहीं।
उस दिन भी मरे भूख से वो कह रहे थे जब।
देखो मेरे निजाम में भूखा कोई नहीं
सर पे हर इक गरीब के छत देंगे इस दफा
वो कर रहा है जिसका भरोसा कोई नहीं
हम हैं तो सब हैं ठीक वगरना यहां पे तो।
हर आदमी ख़राब है अच्छा कोई नहीं
स्कूल अस्पताल खेत गांव जानवर
वाजिब है जो सवाल उठाता कोई नहीं
सूरत बदलने वाले बदलने लगे हैं नाम ।
हालात क्युं शहर के बदलता कोई नहीं
लोगों के मसअले हैं हुए जबसे दरकिनार
तब से किसी चुनाव में जीता कोई नहीं
राजीव कुमार
यू ट्यूब -- https://youtu.be/tueIBNZEW_U
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