ग़ज़ल
इससे पहले खाते धोखा छोड़ दिया।
प्यार महब्बत हमने करना छोड़ दिया।
इक दूजे के नाम पे मरना छोड़ दिया।
यानी अब बेकार का रोना छोड़ दिया।
उस लङकी से प्यार निभाना मुश्किल है।
जिसने हमको पकङा लूटा छोड़ दिया।
वहसत उज़लत नादानी आवारापन।
देखो हमने सब कुछ अपना छोड़ दिया।
कोलेज कैफ़े माल सिनेमा उसका घर।
वीरानों में और भटकना छोड़ दिया।
उन आँखों की बात न पूछो जाने दो।
जिन आँखो ने खुद को सूखा छोड़ दिया।
हमको भी आराम मयस्सर है तब से।
जब से हमने उनका सपना छोड़ दिया।
इक तितली इक फूल ये शबनम की बूंदें।
जाते जाते रात ने मक्ता छोड़ दिया।
राजीव कुमार
इससे पहले खाते धोखा छोड़ दिया।
प्यार महब्बत हमने करना छोड़ दिया।
इक दूजे के नाम पे मरना छोड़ दिया।
यानी अब बेकार का रोना छोड़ दिया।
उस लङकी से प्यार निभाना मुश्किल है।
जिसने हमको पकङा लूटा छोड़ दिया।
वहसत उज़लत नादानी आवारापन।
देखो हमने सब कुछ अपना छोड़ दिया।
कोलेज कैफ़े माल सिनेमा उसका घर।
वीरानों में और भटकना छोड़ दिया।
उन आँखों की बात न पूछो जाने दो।
जिन आँखो ने खुद को सूखा छोड़ दिया।
हमको भी आराम मयस्सर है तब से।
जब से हमने उनका सपना छोड़ दिया।
इक तितली इक फूल ये शबनम की बूंदें।
जाते जाते रात ने मक्ता छोड़ दिया।
राजीव कुमार
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