Friday, May 3, 2019

सच कहूँ गर तेरा पैगाम नहीं आएगा।

ग़ज़ल

सच कहूँ गर तेरा पैगाम नहीं आएगा।
नींद आ जायेगी आराम नहीं आएगा।

रंज शिकवा न वफ़ा इश्क़ न आँसू कोई।
बाद मेरे तेरे कुछ काम नहीं आएगा

लोग कहते हैं तेरे शह्र में ख़ुद ही चल कर।
ज़ह्र आ जायेगा पर जाम नहीं आएगा।

इस नये दौर की ग़ज़लों में नज़ाकत की जगह।
इक सिवा तेरे कोई नाम नहीं आएगा।

दर्द में आह में दुनिया में नशे में मुझमें
तेरा होना भी मेरे  काम नहीं आएगा

गर मेरे साथ चलोगी तो यकीं है मुझको
उम्र भर  गर्दिश ए अय्याम नहीं आएगा ।

हुस्न वालों को सहूलत है यही की उन पर ।
ज़ुर्म कर दें भी तो इल्ज़ाम नहीं आएगा।

आज तुम बेर लिए बैठी रहो शबरी जी
मुझको मालूम है अब राम नहीं आएगा

राजीव कुमार

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