Monday, May 27, 2019

सच कहूँ किस ख़ुशी से रौशन है।

ग़ज़ल

सच कहूँ किस ख़ुशी से रौशन है।
दिल तेरी आशिकी से रौशन है।

उसकी दीवानगी से मैं और वो।
मेरी दीवानगी से रौशन है।

ज़िन्दगी जुगनुओं की देखो तो।
अस्ल मे तीरगी से रौशन है।

पहले रौशन थी अपनी रंगत से।
अब मेरी शाइरी से रौशन है।

जो पहनना हो वो पहन लो पर।
हुस्न तो सादगी से रौशन है।

दोस्त चाहत का ये  समंदर भी।
हर तरफ तिश्नगी से रौशन है।

तेरी तस्वीर तेरा खत और मैं।
आज हर शय तुझी से रौशन है।

अच्छा लगता है जान कर मुझको
तेरी दुनिया मुझी से रौशन है

मैं जहाँ से हूँ वो शह्र यारों।
माँ सरीखी नदी से रौशन है।

राजीव कुमार

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