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सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।
ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...
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ग़ज़ल जबसे दिल में उतर गयी गंगा मैल सब मन के हर गयी गंगा घर से निकला तो मां की आंखों में मैने देखा बिखर गयी गंगा। सिर्फ पानी नहीं य...
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कोई वादा अपना आप निभाओ तो। कब आयेगा काळा धन बतलाओ तो बन जाना भगवान किसानों के चाचा। दाम फसल का ढेङ गुना दिलवाओ तो। ना खाउंगा और ना ही...
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भोजपुरी ग़ज़ल सीधा रास्ता छोड़ के टेड़े राह चलेलन राजीव जी प्रेम करेलन दर्द सहेलन मस्त रहेलन राजीव जी जेब त खाली बाटे बाकिर अपने दि...

तेरी ख़ातिर मैं अब तुझको सताना भूल जाता हूँ।
ReplyDeleteतुझे ए ज़िन्दगी चल आज़माना भूल जाता हूँ।
महब्बत दिल में है लेकिन जताना भूल जाता हूँ।
तेरी दुनियां के रस्मों को निभाना भूल जाता हूँ।
हमेशा आईना ही आख़िरी में टूट जाता है।
इसी डर से मैं सच के साथ जाना भूल जाता हूँ।
ज़रा सी बात पर भी गर मेरी बिटिया कभी रो दे।
कई दिन तक मैं यारों मुस्कुराना भूल जाता हूँ ।
जिसे भी देखिये दौलत के पीछे बावला सा है।
इधर मैं शेर कहने में कमाना भूल जाता हूँ ।
राजीव कुमार