अपने पसंदीदा शायर समीर परीमल साहब के साथ मिल कर कही गजल
जिन्दजी ऐसी नहीं है कि जैसे पिक्चर में
आधी जूते में गुजरती हे आधी बिस्तर में
राजीव
आधी जूते में गुजरती हे आधी बिस्तर में
राजीव
कितने गफलत में गुम है आज का इन्सां यारों।
पहले खोया था सवालों में अब है उत्तर में
राजीव
पहले खोया था सवालों में अब है उत्तर में
राजीव
शेर कहते रहे यूँ ही तो है यकीं मुझको
आपके लफ्ज़ जान फूंक देंगे पत्थर में
समीर
आपके लफ्ज़ जान फूंक देंगे पत्थर में
समीर
जेब खाली हे मगर इतनी हे सोहरत हासिल।
सारी दुनियां की मुहब्बत हे मेरे छप्पर में
राजीव
सारी दुनियां की मुहब्बत हे मेरे छप्पर में
राजीव
उम्र गुज़री तमाम ढूँढने में 'परिमल' को
ख्वाब में रात इक काटी थी जो तेरे घर में
समीर
ख्वाब में रात इक काटी थी जो तेरे घर में
समीर
समीर परीमल और राजीव कुमार
No comments:
Post a Comment