Monday, June 8, 2015

झूठ नफरत बेईमानी सोलह आने हो गये।

झूठ नफरत बेईमानी सोलह आने हो गये।
और ये ईमान के सिक्के पुराने हो गये।
खुद के हिस्से की खुशी को छोङ कर पाला जिन्हें।
आज वो बच्चे ही अपनो से बेगाने हो गये।
हादशों का सिलसिला भी खत्म कर दे ए खुदा
अब मकां मजहब के सारे कत्ल खाने हो गये।
बस जरा सी देर वो आये चमन में घूमने ।
क्या कली क्या फूल तितली सब दिवाने हो गये
मुफलिसी का दौर जारी था, रहेगा, देखिये।
हुक्मरां इस मुल्क के फिर कुछ घराने हो गये।
है हकीकत क्या तरक्की की यकीं किस पर करें।
मण्डीयों से मीडीया के दोस्ताने हो गये ।
राजिव कुमार

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