---------- गजल पेश है
शीसा दिल मेरा पत्थर है ।
पहले से ज्यादा बेहतर है।
पहले से ज्यादा बेहतर है।
जीवन के रस्तों में शायद
अपनी किस्मत में ठोकर है
अपनी किस्मत में ठोकर है
इश्क वफा ईमान जहां में
तेरे बिन सब कुछ बद्तर है
तेरे बिन सब कुछ बद्तर है
गुलसन तो महका है लेकिन
फूलों को कांटों का डर है
फूलों को कांटों का डर है
मस्त हवाओं में जाने जां
तेरी खुश्बू का नस्तर है
तेरी खुश्बू का नस्तर है
धरती पर रहने वालों की।
आंखों में रहता अम्बर है।
आंखों में रहता अम्बर है।
दूनियां के हर विष को पी लूं।
मेरे भीतर भी शंकर है।
मेरे भीतर भी शंकर है।
राजीव कुमार
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