जितने लोग हो उतने किस्से होते है
दिल के रिस्ते दिल के रिस्ते होते हैं
सीधे सच्चे प्यारे अच्छे होते है
अपने बैच के लड़के अपने होते है
जिस दुनिया से हम हैं उसमें सबके सब
थोड़ी पगली थोड़े पगले होते हैं
पहली बार जो कोंट्री कर दारू पी थी
तब जाना था ठेके अच्छे होते है
बब्बल भाई से मिलके तारा कहता था
राजिव पेपर कितने हल्के होते हें
कुछ लड़के स्मार्ट थे लेकिन सिंगल थे
मोनू भाई पाप पुराने भी जन्मों के होते हैं
डीन काल करवाया पर ये भूल गयी
डीन भी तो हम जैसे लड़के होते है
दिन भर सीसी बीसी राते मोबाइल पर
जावेद जैसे लड़के विरले होते हैं
खूब गये लाइब्रेरी तब ये ज्ञान हुआ
यारों बच्चे दो ही अच्छे होते हैं
लड़कियाँ जैसी थीं वैसी हैं लेकिन
लड़के साले जल्दी बुढ्ढे होते हैं
चेहरे इक दिन वही चमकते हैं यारों
जिनकी आंख में लाखों सपने होते है
सालों बाद मिले तब हम भी जान गये
लोग जहाँ में कितने प्यारे होते हैं
जितने लोग हो उतने किस्से होते है
दिल के रिस्ते दिल के रिस्ते होते हैं