ग़ज़ल
आंखों में रंज दिल की दुआओं मे ज़हर था।
शाइस्ता महफ़िलों की फिज़ाओं में ज़हर था।
सालों से ख़ुश थे हम भी वो बरसात देखकर।
जिसमें बरसने वाली घटाओं में ज़हर था।
तश्ना लबी तो बच गयी बस तश्ना लब मरे।
यानी के इस मरज की दवाओं में ज़हर था।
सिग्रेट छोड़ने को हमें कह रहे थे वो।
जिनके श़हर की गर्म हवाओं में ज़हर था।
तन्हाई जिस्म खाने लगी तब पता चला।
हर सम्त घर की सूनी ख़लाओं में ज़हर था।
दिल टूटने के बाद ही ये जान पाये हम।
उस बेवफ़ा के दिल की सदाओं में ज़हर था।
चाहत वफ़ा खुलूश अना इश्क़ गैरतें
जीने की इन हसीन अदाओं में ज़हर था।
क़िस्सा हमारे वक़्त का सुनकर कहेंगे लोग।
अच्छा !! तुम्हारे चारों दिशाओं मे ज़हर था।
राजीव कुमार
आंखों में रंज दिल की दुआओं मे ज़हर था।
शाइस्ता महफ़िलों की फिज़ाओं में ज़हर था।
सालों से ख़ुश थे हम भी वो बरसात देखकर।
जिसमें बरसने वाली घटाओं में ज़हर था।
तश्ना लबी तो बच गयी बस तश्ना लब मरे।
यानी के इस मरज की दवाओं में ज़हर था।
सिग्रेट छोड़ने को हमें कह रहे थे वो।
जिनके श़हर की गर्म हवाओं में ज़हर था।
तन्हाई जिस्म खाने लगी तब पता चला।
हर सम्त घर की सूनी ख़लाओं में ज़हर था।
दिल टूटने के बाद ही ये जान पाये हम।
उस बेवफ़ा के दिल की सदाओं में ज़हर था।
चाहत वफ़ा खुलूश अना इश्क़ गैरतें
जीने की इन हसीन अदाओं में ज़हर था।
क़िस्सा हमारे वक़्त का सुनकर कहेंगे लोग।
अच्छा !! तुम्हारे चारों दिशाओं मे ज़हर था।
राजीव कुमार
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