Sunday, April 5, 2020

जो तुमने सिखाया था वही गा रहे हैं हम

ग़ज़ल

जो तुमने सिखाया था वही गा रहे हैं हम
यानी तुम्हारा तुमको ही लौटा रहे हैं हम

क्यूँ रोज रोज हमको डराते हो मौत से
दर अस्ल पहले दिन से ही घबरा रहे हैं हम

हक़ और हूकूक क्या है अजी छोङिये जनाब
ये सारे लफ्ज़ बोल के पछता रहे हैं हम

मुर्दा दिलों के बीच में जीना है इस लिये
अपना ही ख़ून पी के जीये जा रहे हैं हम

बीमार लोग ज़हन से हैं या कि बदन से।
क्या ख़ुद से ये सवाल पूछ पा रहे हैं हम

जिस दौर में सच बोलने वाला कोई नहीं
उस दौर में सच बोल के बतला रहे हैं हम

राजीव कुमार

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