ग़ज़ल
जो तुमने सिखाया था वही गा रहे हैं हम
यानी तुम्हारा तुमको ही लौटा रहे हैं हम
क्यूँ रोज रोज हमको डराते हो मौत से
दर अस्ल पहले दिन से ही घबरा रहे हैं हम
हक़ और हूकूक क्या है अजी छोङिये जनाब
ये सारे लफ्ज़ बोल के पछता रहे हैं हम
मुर्दा दिलों के बीच में जीना है इस लिये
अपना ही ख़ून पी के जीये जा रहे हैं हम
बीमार लोग ज़हन से हैं या कि बदन से।
क्या ख़ुद से ये सवाल पूछ पा रहे हैं हम
जिस दौर में सच बोलने वाला कोई नहीं
उस दौर में सच बोल के बतला रहे हैं हम
राजीव कुमार
जो तुमने सिखाया था वही गा रहे हैं हम
यानी तुम्हारा तुमको ही लौटा रहे हैं हम
क्यूँ रोज रोज हमको डराते हो मौत से
दर अस्ल पहले दिन से ही घबरा रहे हैं हम
हक़ और हूकूक क्या है अजी छोङिये जनाब
ये सारे लफ्ज़ बोल के पछता रहे हैं हम
मुर्दा दिलों के बीच में जीना है इस लिये
अपना ही ख़ून पी के जीये जा रहे हैं हम
बीमार लोग ज़हन से हैं या कि बदन से।
क्या ख़ुद से ये सवाल पूछ पा रहे हैं हम
जिस दौर में सच बोलने वाला कोई नहीं
उस दौर में सच बोल के बतला रहे हैं हम
राजीव कुमार
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