Wednesday, April 17, 2019

फेर लेते हैं जो मुँह आप ये बोसा लेकर ।

ग़ज़ल

फेर  लेते  हैं  जो  मुँह  आप  ये  बोसा  लेकर ।
चैन   आयेगा   मुझे   आपसे    बदला   लेकर।

कौन  कहता  है  यहाँ  अपना  अक़ीदा लेकर।
लोग  कहते  हैं ग़ज़ल  आप  से मिसरा लेकर।

चाँद   आया  है   इधर  आप  सा  चेहरा लेकर।
अब  इधर   रात   न   आयेगी  अंधेरा   लेकर।

तुमको  देखा  तो मेरी  जान  ये  मालूम  हुआ।
फूल खिलते हैं  सुब्ह  हुस्न ये किसका लेकर।

एक  ही दर्द  है  हर  एक का  इक है  क़िस्सा।
शह्र-ए-उल्फ़त से वो जो आया है धोखा लेकर।

लोग   ईमान    लिये   हाथ   में   बैठे    देखे ।
जब कभी  हम भी  गये जेब  में पैसा  लेकर।

राजीव कुमार

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