Wednesday, April 17, 2019

हर कदम सिर्फ इम्तिहान है क्या

ग़ज़ल

हर कदम सिर्फ इम्तिहान है क्या
मौला तेरा ही ये ज़हान है क्या

यार मुश्किल में तेरी जान है क्या
दौरे हाज़िर का तू किसान है क्या

आप भी हक़ बयान करते हैं
आपके मुँह में भी ज़बान है क्या

वो जो खाते है भूख पानी से।
उनके जीवन में इत्मीनान है क्या।

जितना चाहो ज़हर उगल आओ।
ये इलेक्शन भी पीकदान है क्या।

तुमने पिछली दफ़ा किया था जो।
कोई वादा तुम्हे भी ध्यान है क्या।

तेरी तकरीर में कहीं पर भी।
रोजी रोटी है और मकान है क्या।

राजीव कुमार

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