ग़ज़ल
खुशामद कर रहे हैं खा रहे हैं
ये चैनल बस हमें भरमा रहे हैं
हमारे दम से तो चलते हैं लेकिन
हमीं पर रोज ये गुर्रा रहे हैं।
कभी चूहा नहीं जो मार पाये
वो एंकर वर्दियों में आ रहे हैं
अजी हिन्दू मुसलमां को लड़ा कर
ये ससूरे देश हित समझा रहे हैं ।
शहादत से नहीं मतलब है इनको।
ये बस टी आर पी चमका रहे हैं
अभी सरकार लाशें गिन रही है।
मगर ये तीन सौ बतला रहे हैं
ये दंगल और हल्ला बोल करके
अजी बस शोर ही बरपा रहे हैं
किसी के झूठ को इक सच बता कर।
हमारे सच को बस झुठला रहे हैं।
जवाबों से हमें महरूम कर के।
सवालों में फक़त उलझा रहे हैं।
ये जनता अपना रोना रो रही है।
ये चैनल अपना गाना गा रहे हैं।
बहस के नाम पर हर रोज देखो
गधे टीवी पे रेंकें जा रहे हैं।
राजीव कुमार
शेयर करते रहें दोस्तों 🙏🙏🙏
खुशामद कर रहे हैं खा रहे हैं
ये चैनल बस हमें भरमा रहे हैं
हमारे दम से तो चलते हैं लेकिन
हमीं पर रोज ये गुर्रा रहे हैं।
कभी चूहा नहीं जो मार पाये
वो एंकर वर्दियों में आ रहे हैं
अजी हिन्दू मुसलमां को लड़ा कर
ये ससूरे देश हित समझा रहे हैं ।
शहादत से नहीं मतलब है इनको।
ये बस टी आर पी चमका रहे हैं
अभी सरकार लाशें गिन रही है।
मगर ये तीन सौ बतला रहे हैं
ये दंगल और हल्ला बोल करके
अजी बस शोर ही बरपा रहे हैं
किसी के झूठ को इक सच बता कर।
हमारे सच को बस झुठला रहे हैं।
जवाबों से हमें महरूम कर के।
सवालों में फक़त उलझा रहे हैं।
ये जनता अपना रोना रो रही है।
ये चैनल अपना गाना गा रहे हैं।
बहस के नाम पर हर रोज देखो
गधे टीवी पे रेंकें जा रहे हैं।
राजीव कुमार
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