*ग़ज़ल*
वो जिसके होने से निस्बत ख़राब होती है।
मेरी नज़र में वो गैरत ख़राब होती है।
ये मर्ज़े इश्क है इसके मरीज़ की यारों।
दवा के नाम से हालत ख़राब होती है।
हमारी छोड़िये हम तो अवाम हैं साहब।
हमारे जैसों की क़िस्मत ख़राब होती है।
शहर का हाल बदलते हैं नाम से पहले।
नहीं तो नाम की अज़्मत ख़राब होती है।
कोई बताये जो रहबर है मुल्क़ का उसको।
किसी भी मुल्क़ में नफ़रत ख़राब होती है।।
राजीव कुमार
निस्बत- सम्बंध
वो जिसके होने से निस्बत ख़राब होती है।
मेरी नज़र में वो गैरत ख़राब होती है।
ये मर्ज़े इश्क है इसके मरीज़ की यारों।
दवा के नाम से हालत ख़राब होती है।
हमारी छोड़िये हम तो अवाम हैं साहब।
हमारे जैसों की क़िस्मत ख़राब होती है।
शहर का हाल बदलते हैं नाम से पहले।
नहीं तो नाम की अज़्मत ख़राब होती है।
कोई बताये जो रहबर है मुल्क़ का उसको।
किसी भी मुल्क़ में नफ़रत ख़राब होती है।।
राजीव कुमार
निस्बत- सम्बंध
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