ग़ज़ल
हर कदम सिर्फ इम्तिहान है क्या
मौला तेरा ही ये ज़हान है क्या
यार मुश्किल में तेरी जान है क्या
दौरे हाज़िर का तू किसान है क्या
आप भी हक़ बयान करते हैं
आपके मुँह में भी ज़बान है क्या
वो जो खाते है भूख पानी से।
उनके जीवन में इत्मीनान है क्या।
जितना चाहो ज़हर उगल आओ।
ये इलेक्शन भी पीकदान है क्या।
तुमने पिछली दफ़ा किया था जो।
कोई वादा तुम्हे भी ध्यान है क्या।
तेरी तकरीर में कहीं पर भी।
रोजी रोटी है और मकान है क्या।
राजीव कुमार
हर कदम सिर्फ इम्तिहान है क्या
मौला तेरा ही ये ज़हान है क्या
यार मुश्किल में तेरी जान है क्या
दौरे हाज़िर का तू किसान है क्या
आप भी हक़ बयान करते हैं
आपके मुँह में भी ज़बान है क्या
वो जो खाते है भूख पानी से।
उनके जीवन में इत्मीनान है क्या।
जितना चाहो ज़हर उगल आओ।
ये इलेक्शन भी पीकदान है क्या।
तुमने पिछली दफ़ा किया था जो।
कोई वादा तुम्हे भी ध्यान है क्या।
तेरी तकरीर में कहीं पर भी।
रोजी रोटी है और मकान है क्या।
राजीव कुमार