Sunday, September 14, 2014

दर्द सीने का तेरा खुद ही दवा हो जायेगा।

गजल -2

दर्द सीने का तेरा खुद ही दवा हो जायेगा।
तू भी इक दिन चाहतों का देवता हो जायेगा।

यूं नकाब उल्टे किये न शहर में निकला करो।
फिर शरीफों के शहर में हादसा हों जायेगा।

बस मुहब्बत की नजर से इक नजर तो देख लो।
मेरी उल्फत का मुक्कमल फैसला हो जायेगा।

इक सदा हर रोज सोने ही नहीं देती मुझे।
दर्मयां दोनो के सुबहा फांसला हो जायेगा ।

गर ख्यालों में ख्याल ए यार युं आता रहा ।
आशिकी का भी गजल में सिलसिला हो जायेगा ।

हद से ज्यादा इश्क भी अच्छा नहीं है दोस्तों।
ये किसी की खुदखुशी का फलसफा हो जायेगा।

राजीव कुमार

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