दूर हो जाओ हम से जब तो, ऐसा तुम करना,
श्मृतियों के आंगन में, भावों से क्रीडा करना /
नहीं सरल तो, नहीं विरल भी जीवन के सतरंगी पथ,
यही सत्य है यही गत्य है जीवन का बजरंगी तथ्य/
जीवन युद्ध में निपुण बना कर, दूर कहाँ अब जाओगे ,
द्रिड निश्चय है पितृ पक्ष में मुझसे मिलने आओगे
मृत्यु भी है अश्व मेघ कह देना अब देवो से ,
विश्व विजयी तो बन ही गए हो स्वर्ग विजय भी कर लेना/
स्वर्ग विजय कर विजय पताका जैसे ही फहराओगे,
मुझे याकि है पुनर्जन्म में मेरा साथ निभाओगे.

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