ए खुदा तेरी मेहरबानी है
मेरे भीतर जो सचबयानी है
शाइरी रोज इक तमाशा है
शाइरी रोज इक कहानी है
दर्द ने दिल ने हिज्र औ गम ने
कल बिठा करके कह रहे थे कि
बार बार हम को न सताया करो
रोज दुखती है इन रगों को तुम
वक्त बे वक्त न दबाया करो,
दर्द हमको भी बहुत होते हैं
तेरी गज़लों में हम ही रोते है
कल तो अहसास ने भी खूब यूँ गजब ढाया,
बेवजह उसने मेरे गम को बहुत धमकाया/
हर घडी सुध जो खो के रहता है ,
रात अहसास मुझ से कहता है ,
फूल पत्तों की परिन्दों की जबां सुनता हूं
रोज गमगीन पहाङों की जबां सुनता हूं
क्या कहूं मुझसे नदी बोल रही है क्या क्या
एक लम्हे से सदी बोल रही है क्या क्या
मुझको बारिस की घटाओं ने पकङ रक्खा है
मुझको सबनम की सदाओं ने पकङ रक्खा है।
तीरगी मेरी तबीयत को समझ लेती है
रौशनी मेरी जरूरत को समझ लेती है
शह्र की भीङ से अब दूर मुझे ले जाओ
मुझसे वीरानीयां कहती हैं की अब आ जाओ
चलो बस भी करो अब दिल से आओ बात करें.
दिल की हर एक जरूरत से मुलाक़ात करें
फिर मेरे दिल ने मेरा हाथ पाकङ करके कहा,
मुझको तुम माफ करो मैं भी तुम्हारा न रहा।
दिल की दुनिया को हिफाजत से रखा जाता है
दिल की दुनिया में शराफत से रहा जाता है।
दिल की दुनिया में अजीयत का सबब दिल ही है
दिल की दुनिया में मलामत का सबब दिल ही है
दिल की दुनिया में महब्बत की जगह होती है
दिल की दुनिया में इबादत की जगह होती है
दिल कि दुनिया में हर इक गम का बसेरा है पर
दिल की दुनिया मे मसर्रत की जगह कोई नही
एक ही दर्द से तकलीफ से मैं डरता हूं
प्यार जिससे है उसी शख्स को अखरता हूं
रोज मैं ही हूँ वो जो टूटता बिखरता हूँ,
तेरे सीने में हूँ पर उसे पे रोज मरता हूँ
दिल की बातों को सुन के इश्क़ ने कहा "अच्छा"
तू तो झूठा है बड़ा आया तू नहीं सच्चा
तेरी बातों में आ के इश्क़ मेरा नाम हुआ ,
हर गली चौक चोराहे पे मैं बदनाम हुआ
इश्क से बढ़ के बर्गूजीना क्या
इश्क दिल में नहीं तो जीना क्या
इश्क दीवार भी है दर भी है।
इश्क दुनिया है एक घर भी है
इश्क में हर तरफ ही बंधन है
इश्क का हर कोई ही दुश्मन है
इश्क़ का दोस्त एक पंखा है
इश्क़ आखिर में उस पे लटका है
ये है अंजाम फिर भी जिंदा हूं
खत्म जो ना हो ऐसा किस्सा हू
मै तबाही भी हूं दुआ भी हू
आग हूं और मैं हवा भी हूं
मुझसे ज्यादा अमीर कोई नही
मेरे जैसा फकीर कोई नहीं
अब तो हर रोज का ये किस्सा है ,
मेरी गजलों में इनका हिस्सा है
बात ये है तो कर रहा हूं मैं
हर घडी इनसे लड़ रहा हूं मैं
मुझको पागल बनाये रहते हैं
मुझको ख्वाबों में रोज दिखते हैं
ये हकीकत भी ख्वाब जैसा है
अब तो कांटा गुलाब जैसा है
सच है इनसे ही जिंदगानी है
आप हैं मैं हूं और जवानी है
ये मेरे जहन की रवानी है।
मेरी गजलों की ये कहानी है।
राजीव कुमार
मेरे भीतर जो सचबयानी है
शाइरी रोज इक तमाशा है
शाइरी रोज इक कहानी है
दर्द ने दिल ने हिज्र औ गम ने
कल बिठा करके कह रहे थे कि
बार बार हम को न सताया करो
रोज दुखती है इन रगों को तुम
वक्त बे वक्त न दबाया करो,
दर्द हमको भी बहुत होते हैं
तेरी गज़लों में हम ही रोते है
कल तो अहसास ने भी खूब यूँ गजब ढाया,
बेवजह उसने मेरे गम को बहुत धमकाया/
हर घडी सुध जो खो के रहता है ,
रात अहसास मुझ से कहता है ,
फूल पत्तों की परिन्दों की जबां सुनता हूं
रोज गमगीन पहाङों की जबां सुनता हूं
क्या कहूं मुझसे नदी बोल रही है क्या क्या
एक लम्हे से सदी बोल रही है क्या क्या
मुझको बारिस की घटाओं ने पकङ रक्खा है
मुझको सबनम की सदाओं ने पकङ रक्खा है।
तीरगी मेरी तबीयत को समझ लेती है
रौशनी मेरी जरूरत को समझ लेती है
शह्र की भीङ से अब दूर मुझे ले जाओ
मुझसे वीरानीयां कहती हैं की अब आ जाओ
चलो बस भी करो अब दिल से आओ बात करें.
दिल की हर एक जरूरत से मुलाक़ात करें
फिर मेरे दिल ने मेरा हाथ पाकङ करके कहा,
मुझको तुम माफ करो मैं भी तुम्हारा न रहा।
दिल की दुनिया को हिफाजत से रखा जाता है
दिल की दुनिया में शराफत से रहा जाता है।
दिल की दुनिया में अजीयत का सबब दिल ही है
दिल की दुनिया में मलामत का सबब दिल ही है
दिल की दुनिया में महब्बत की जगह होती है
दिल की दुनिया में इबादत की जगह होती है
दिल कि दुनिया में हर इक गम का बसेरा है पर
दिल की दुनिया मे मसर्रत की जगह कोई नही
एक ही दर्द से तकलीफ से मैं डरता हूं
प्यार जिससे है उसी शख्स को अखरता हूं
रोज मैं ही हूँ वो जो टूटता बिखरता हूँ,
तेरे सीने में हूँ पर उसे पे रोज मरता हूँ
दिल की बातों को सुन के इश्क़ ने कहा "अच्छा"
तू तो झूठा है बड़ा आया तू नहीं सच्चा
तेरी बातों में आ के इश्क़ मेरा नाम हुआ ,
हर गली चौक चोराहे पे मैं बदनाम हुआ
इश्क से बढ़ के बर्गूजीना क्या
इश्क दिल में नहीं तो जीना क्या
इश्क दीवार भी है दर भी है।
इश्क दुनिया है एक घर भी है
इश्क में हर तरफ ही बंधन है
इश्क का हर कोई ही दुश्मन है
इश्क़ का दोस्त एक पंखा है
इश्क़ आखिर में उस पे लटका है
ये है अंजाम फिर भी जिंदा हूं
खत्म जो ना हो ऐसा किस्सा हू
मै तबाही भी हूं दुआ भी हू
आग हूं और मैं हवा भी हूं
मुझसे ज्यादा अमीर कोई नही
मेरे जैसा फकीर कोई नहीं
अब तो हर रोज का ये किस्सा है ,
मेरी गजलों में इनका हिस्सा है
बात ये है तो कर रहा हूं मैं
हर घडी इनसे लड़ रहा हूं मैं
मुझको पागल बनाये रहते हैं
मुझको ख्वाबों में रोज दिखते हैं
ये हकीकत भी ख्वाब जैसा है
अब तो कांटा गुलाब जैसा है
सच है इनसे ही जिंदगानी है
आप हैं मैं हूं और जवानी है
ये मेरे जहन की रवानी है।
मेरी गजलों की ये कहानी है।
राजीव कुमार
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