मतला
निकल जायेगी राहे पुर खतर से
मुहब्बत मिट नहीं पायेगी डर से
मुहब्बत मिट नहीं पायेगी डर से
मिटा दे गम जो मेरे दिल जिगर से
मुझे वाकिफ करा दो उस जहर से
मुझे वाकिफ करा दो उस जहर से
मेरा घर है मेरी बेटी से रौशन ।
मूझे लेना है क्या शम्सो कमर से।
मूझे लेना है क्या शम्सो कमर से।
सराफत शर्म सच और साफगोई
कहां रक्खे उठा कर अपने सर से
कहां रक्खे उठा कर अपने सर से
लिपट कर रोने वाले भाग लेंगे
अगर मै उठ गया अपनी कबर से
अगर मै उठ गया अपनी कबर से
राजीव कुमार
No comments:
Post a Comment