मुहब्बत है तिरे दिल मे इसे तू मत छुपाया कर
लबो से गर नहीं मुमकिन तो आंखो से बताया कर
लबो से गर नहीं मुमकिन तो आंखो से बताया कर
हया से सर झुका कर फिर जरा सा मुस्कुराया कर
बहुत मीठा जहर है ये इसे मुझको पिलाया कर
बहुत मीठा जहर है ये इसे मुझको पिलाया कर
मेरी आखों मे कोई ख्वाब बन के रहने वाली सुन
मुझे भी अपने ख्वाबो मे कभी तू भी बुलाया कर
मुझे भी अपने ख्वाबो मे कभी तू भी बुलाया कर
राजीव कुमार