Thursday, June 9, 2016

मुहब्बत है तिरे दिल मे इसे तू मत छुपाया कर

मुहब्बत है तिरे दिल मे इसे तू मत छुपाया कर
लबो से गर नहीं मुमकिन तो आंखो से बताया कर
हया से सर झुका कर फिर जरा सा मुस्कुराया कर
बहुत मीठा जहर है ये इसे मुझको पिलाया कर
मेरी आखों मे कोई ख्वाब बन के रहने वाली सुन
मुझे भी अपने ख्वाबो मे कभी तू भी बुलाया कर
राजीव कुमार

वो तमाम दुनिया का है मगर मैं जताऊँ हक़ तो मिरा नहीं ।

वो तमाम दुनिया का है मगर मैं जताऊँ हक़ तो मिरा नहीं ।
उसे कैसे अपना खुदा कहूं, मुझे अब तलक जो मिला नहीं।
इस दौर में किसी शक्स ने कभी इश्क मर के जिया नहीं
कोई लैला जैसी हुई नहीं कोई क़ैस जैसा बना नहीं
ये अजीब किस्सा ए जिस्त है कि हर इक कदम पे हैं ठोकरें।
मेरा हम सफर यही सोच कर कभी साथ मेरे  चला नहीं ।
कभी दरिया बन के उतर गया कभी सहरा जैसे ठहर गया।
तेरा ख्वाब पलकों से जाने जां कभी अश्क बन के गिरा नहीं
जहां आंधियों के थे घर वहीं मैने अपना घर भी बना लिया।
तेरी याद घर से लिपट गयी मेरे घर से कुछ भी उड़ा नहीं
ये सवाल फिक्र का है नहीं ये तो मसअला है ख्याल का ।
तेरी जिन्दगी की गजल हुई मेरा शेर अब भी हुआ नहीं
राजीव कुमार
क़ैस- मजनू
जिस्त- जीवन

मुश्किल से मुश्किल देखा है

मुश्किल से मुश्किल देखा है
रस्ता और मंजिल देखा है
पत्थर की दुनिया में हमने
शीशे जैसा दिल देखा है
राजीव

जिस्म से जान लूट लेगा क्या ।

जिस्म से जान लूट लेगा क्या ।
सारा सामान लूट लेगा क्या ।
तू नशा करके अपने बच्चों की ।
यार मुस्कान लूट लेगा क्या ।
ये जमीं आसमां हवा पानी।
सबको इन्सान लूट लेगा क्या।
मौत के बाद घर फरिश्तों के।
कोई सुल्तान लूट लेगा क्या ।
करके मिट्टी से तू अलग मुझको।
मेरी पहचान लूट लेगा क्या ।
पहले जापान लूट आया था ।
अबके तेहरान लूट लेगा क्या।
राजीव कुमार

मुहब्बत बे असर कर दी गयी है

मुहब्बत बे असर कर दी गयी है
ये दुनियां इस कदर कर दी गयी है
अमीरों की खुशी के ही लिये बस।
गरीबी दर ब दर कर दी गयी है ।
जहां तक बात है सच झूठ की तो
इधर की सब उधर कर दी गयी है
कभी आवारगी थी जिन्दगी अब।
महज दफ्तर से घर कर दी गयी है
वफा, ईमान, चाहत, सादगी की
हर इक राह पुरखतर कर दी गयी है
मजा आने लगा है अब सफर का
वो मेरी हम सफर कर दी गयी है
राजीव कुमार

हमें इश्क करना सिखा तो न दो गे

हमें इश्क करना सिखा तो न दो गे
हसा कर कहीं फिर रुला तो न दोगे
कहो दिल से पहले सजा तो न दोगे
मुझे जिन्दगी की दुआ तो न दोगे
मै इक राज अपना बताता हू लेकिन
सरे आम सबको बता तो न दोगे
जमी आसमां चांद तारों से आगे
हमें आप पैदल चला तो न दोगे
मुझे छोड़ कर आज तो जा रहे हो
कल आने का वादा भुला तो न दोगे
मुहब्बत नहीं तो अदावत ही रक्खो
ये रिश्ते कहीं तुम मिटा तो न दोगे
मेरा नाम बदनाम है शायरों में ।
मुझे नाम कोई नया तो न दोगे
राजीव कुमार

हम अगर आप को भुला देंगे


हम अगर आप को भुला देंगे
उम्र भर खुद को ही सजा देंगे

जानो दिल तुमको दिल रुबा देंगे
हम भी पत्थर को आइना देंगे

दर्द जब हद से गुजर जायेगा
हम भी थोड़ा सा मुस्कुरा देंगे

ऐसा लगता है ये सियासी लोग
मिल के इस मुल्क को मिटा देंगे

तो चलो मैकदे में चलते है ।
शायरों से तुम्हे मिला देंगे ।
राजीव

निकल जायेगी राहे पुर खतर से

मतला
निकल जायेगी राहे पुर खतर से
मुहब्बत मिट नहीं पायेगी डर से
मिटा दे गम जो मेरे दिल जिगर से
मुझे वाकिफ करा दो उस जहर से
मेरा घर है मेरी बेटी से रौशन ।
मूझे लेना है क्या शम्सो कमर से।
सराफत शर्म सच और साफगोई
कहां रक्खे उठा कर अपने सर से
लिपट कर रोने वाले भाग लेंगे 
अगर मै उठ गया अपनी कबर से
राजीव कुमार

हुक्मरानों अब तो जा कर देख लो

हुक्मरानों अब तो जा कर देख लो
मुल्क में सूखे का मंजर देख लो
खाक होती जा रहीं हैं हसरतें
हम किसानों का मुकद्दर देख लो
रेत ही बाकी बची है हर जगह
हैं कहां किस ओर पुष्कर देख लो
आदमी से आदमी का वास्ता ।
क्या बतायें जाओ अजगर देख लो
सरहदो में बंट गयी सारी जमीं
रह गया है सिर्फ अम्बर देख लो
सारी दुनिया आप की हो जायेगी
आप नक्से से लिपटकर देख लो
राजीव कुमार
जलाशय -पुष्कर

सिर्फ मुझको ही सताने पे उतारू है अब

बस यूँ ही
सिर्फ मुझको ही सताने पे उतारू है अब
तू भी क्या इश्क निभाने पे उतारू है अब
खून आखो से बहाता था मेरी खातिर जो ।
वो मिरा खून बहाने पे उतारू है अब ॥
एक सहरा कभी दरिया का नहीं हो सकता।
तू भी किस किस को मिलाने पे उतारू है अब।
मैं जमाने से लड़ूं और जमाना मुझसे
दिल किसी को तो मिटाने पे उतारू है अब।
मेरे सपनों को हकीकत तो बना दे मौला।
तू तो मुझको ही भूलाने पे उतारू है अब।
राजीव कुमार
जिन्हें समझे थे हम झगड़ो पे मिट्टी डालने वाले।
वही सब बन गये हैं अब डकैती डालने वाले ।
बताओ क्या कहें हम मुल्क के उन रहनुमाओ से।
वही सारे तो हैं जख्मो पे मिर्ची डालने वाले
राजीव कुमार

सिर्फ आजाद होने का सबक मांग रहा है

सिर्फ आजाद होने का सबक मांग रहा है
वो गुनहगार नहीं जो हक मांग रहा है।
दुश्मनी देखो अंधेरों की उसी से है जो
इन अंधेरों में चिरागों से चमक मांग रहा है
आम इन्सान था औकात में रहता लेकिन ।
तू हूकूमत से हूकूमत की ठसक मांग रहा है।
सच कहुं गर मैं हकीकत का हवाला दे कर
हुक्मरां अब तो यहां जान तलक मांग रहा है
हम किसानों को मियां थोङी तो राहत दे दो।
आप से कौन सितारा ए फलक मांग रहा है।
राजीव कुमार

किसानों को फसलों की कीमत दिला दो


किसानों को फसलों की कीमत दिला दो
इन्हें आप मत अब सगुफा नया दो
न अधिया न पौवा न देशी न इंग्लिस
इलेक्सन खतम हो गया हे बता दो
बहुत देश भक्ती दिखाई हे तुमने
कहां कला घन है ये अब तो दिखा दो
पुराने दिनों को भले कोस लेना ।
मगर अच्छे दिन का कोई तो पता दो
राजीव कुमार

अगर झूठ बोला हे तो फिर सजा दो

अगर झूठ बोला हे तो फिर सजा दो
मुहब्बत मिटा दो या हमको मिटा दो
अरे आशुंओं मेरी इज्जत बचा दो
कहा है किसी ने मुझे मुस्कुरा दो
न हो जाये जाहिर कहीं गम हमारा
जरा राजे दिल आज तुम ही छुपा दो
हकीकत से तुम चाहे नजरें चुरा लो
मगर आईने की खता तो बता दो
ये जीना हे या खुदकुशी हे खुदाया
गरीबों की खातिर ये हे क्या बता दो
न दौलत न सोहरत न हीरे न मोती
अगर दे शको तो हमें भी दुआ दो
मजेदार है जिन्दगी का सफर भी।
नयी मंजिलों को नया रास्ता दो
Rajeev Kumar

आपने रोटी उठाई फैंक दी

आपने रोटी उठाई फैंक दी
मेरी दिनभर की कमाई फैक दी।
इस कुएं में झांक कर तो देखिये
जिसमें हमने हर भलाई फैंक दी
दर्द में कुछ इस तरह आया मजा।
हमने दर्दों की दवाई फेंक दी।
इस सियासत ने हमारे शह्र पर
आज फिर माचिस जलाई फैंक दी
जात मजहब झूठ धोखा दुश्मनी ।
मयकदे ने हर बुराई फैंक दी।
राजीव कुमार

झूठ का सब्ज बाग दिखता है


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झूठ का सब्ज बाग दिखता है
अब अंधेरा चिराग दिखता है
दौरे हाजिर में आप देखो तो
सबके दामन में दाग दिखता हे
हुक्मारानों को इस सियासत में
बस गुणा और भाग दिखता हे
इक जमाने से दोस्त था लेकिन।
अब वही शक्स नाग दिखता है
हुस्न शोला है गर तुम्हारा तो ।
दिल हमारा भी आग दिखता है
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राजीव कुमार

हुस्न वालों से दिल्लगी छोङो।

हुस्न वालों से दिल्लगी छोङो।
अब मियां ऐसी शायरी छोङो।
कौन हर काम ठीक करता है।
आप भी कुछ न कुछ कमी छोङो।
शाम के पांच बज गये हैं क्या ।
अब तो सरकारी नौकरी छोङो।
है बूरी चीज ये शराब तो फिर ।
सबसे पहले इसे तुम्ही छोङो।
पी के हर रोज सब ये कहते है
यारों कल से ये लत बुरी छोङो ।
मैं हरिद्वार में ही रहता हुं ।
मिलना चाहो तो जिन्दगी छोङों ।
राजीव कुमार

सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे ।

ग़ज़ल सीने पे जख्म आंख में दरिया दिखाई दे । आशिक वही जो दर्द में डूबा दिखाई दे जिसको यकीं नहीं है महब्बत में उसे भी मोहन के साथ ख़्वा...